Sri Prâyãg Durga
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all grace of Sri Adhyabhagwati Durga
#मां दुर्गा #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺 #🙏कर्म क्या है❓
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#मां दुर्गा #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺 #🙏शाम की आरती🪔
मां दुर्गा - #8 ~ி ஈ ٥ E .~ 8 మ ٣؟  di  Su E 35 (lಟ್" ನ # ப ii  =5 ( ٤٣ = [ N a ah   VH ಋತ tu ; [L [3 dlini (೩೦೪ W ait %8 7 % 0 #8 ~ி ஈ ٥ E .~ 8 మ ٣؟  di  Su E 35 (lಟ್" ನ # ப ii  =5 ( ٤٣ = [ N a ah   VH ಋತ tu ; [L [3 dlini (೩೦೪ W ait %8 7 % 0 - ShareChat
#मां दुर्गा
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#मां दुर्गा #🙏शाम की आरती🪔 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
मां दुर्गा - & PRAYAc ঐ शक्ति परंपरा में एक सामान्य भ्रम यह उत्पन्न होता है gTT और ललिता त्रिपुरसुन्दरी अलग-अलग देवियाँ हैं, और एक fr शास्त्रों का स्पष्ट सिद्धांत की सेवा करती हैं। নুসহী यह है कि आदि पराशक्ति एक ही हैं और विभिन्न रूपों में प्रकट होकर अपनी लीला का संचालन करती हैं। यह पोस्ट अद्वैत तथ्य को प्रमाणित करती है। इसी A common confusion in the Shakta tradition is that Durga and Lalita Mahatripurasundari are separate goddesses, with one serving the other However the clear principle of the scriptures is that the Primordial Para Shakti is One and She manifests in various forms to conduct Herl divine play (Lila) This post establishes this non- dual truth. & PRAYAc ঐ शक्ति परंपरा में एक सामान्य भ्रम यह उत्पन्न होता है gTT और ललिता त्रिपुरसुन्दरी अलग-अलग देवियाँ हैं, और एक fr शास्त्रों का स्पष्ट सिद्धांत की सेवा करती हैं। নুসহী यह है कि आदि पराशक्ति एक ही हैं और विभिन्न रूपों में प्रकट होकर अपनी लीला का संचालन करती हैं। यह पोस्ट अद्वैत तथ्य को प्रमाणित करती है। इसी A common confusion in the Shakta tradition is that Durga and Lalita Mahatripurasundari are separate goddesses, with one serving the other However the clear principle of the scriptures is that the Primordial Para Shakti is One and She manifests in various forms to conduct Herl divine play (Lila) This post establishes this non- dual truth. - ShareChat
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मां दुर्गा - & PRAYAc ঐ शक्ति परंपरा में एक सामान्य भ्रम यह उत्पन्न होता है gTT और ललिता त्रिपुरसुन्दरी अलग-अलग देवियाँ हैं, और एक fr शास्त्रों का स्पष्ट सिद्धांत की सेवा करती हैं। নুসহী यह है कि आदि पराशक्ति एक ही हैं और विभिन्न रूपों में प्रकट होकर अपनी लीला का संचालन करती हैं। यह पोस्ट अद्वैत तथ्य को प्रमाणित करती है। इसी A common confusion in the Shakta tradition is that Durga and Lalita Mahatripurasundari are separate goddesses, with one serving the other However the clear principle of the scriptures is that the Primordial Para Shakti is One and She manifests in various forms to conduct Herl divine play (Lila) This post establishes this non- dual truth. & PRAYAc ঐ शक्ति परंपरा में एक सामान्य भ्रम यह उत्पन्न होता है gTT और ललिता त्रिपुरसुन्दरी अलग-अलग देवियाँ हैं, और एक fr शास्त्रों का स्पष्ट सिद्धांत की सेवा करती हैं। নুসহী यह है कि आदि पराशक्ति एक ही हैं और विभिन्न रूपों में प्रकट होकर अपनी लीला का संचालन करती हैं। यह पोस्ट अद्वैत तथ्य को प्रमाणित करती है। इसी A common confusion in the Shakta tradition is that Durga and Lalita Mahatripurasundari are separate goddesses, with one serving the other However the clear principle of the scriptures is that the Primordial Para Shakti is One and She manifests in various forms to conduct Herl divine play (Lila) This post establishes this non- dual truth. - ShareChat
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मां दुर्गा - AYAc ೧೩ g గా कठोरज्याटणत्कारबधिरीकृदिक्तटम् ततो देवीशरीरात्तु निर्गतास्तीव्रशक्तयः # ९४ T। कालिका तारिणी बाला त्रिपुरा भैरवी रमा बगला चैव मातंगी तथा त्रिपुरसुन्दरी II ५५ कामाक्षी तुलजा देवी जंभिनी मोहिनी तथा তুমব্চালী छिन्नमस्ता 1 Devi Bhagavatam (7.28.54-56) दशसाहस्त्रबाहुका ।। ५६ 1 यहाँ लीला और भी रहस्यमयी हो जाती है। देवी भागवत में RR ரி$ से अनेकों शक्तियाँ प्रकट होती हैं, जिनमें त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) भी हैं। सिद्ध  होता है कि दुर्गा और ललिता परस्पर उत्पन्न करने वाली नहीं इससे हैं, बल्कि वे एक ही सर्वव्यापी चेतना के विभिन्न पहलू हैं। जिस प्रकार ఢగ కైౌ` भी एक ही हैं अग्नि से उष्णता और प्रकाश अलग-अलग दिखाई  उसी प्रकार यह सभी रूप आदिशक्ति के ही स्वरूप हैं। Here the Lila becomes even more mysterious In the Devi Bhagavatam; from the body of Durga emerge numerous Shaktis including Tripurasundari (Lalita) This proves that Durga and Lalita are not sequentially created from one another but are interdependent aspects of the same all- pervadins consciousness. Just as heat and lisht are inseparable from fire so are these forms inseparable from Adishakti. AYAc ೧೩ g గా कठोरज्याटणत्कारबधिरीकृदिक्तटम् ततो देवीशरीरात्तु निर्गतास्तीव्रशक्तयः # ९४ T। कालिका तारिणी बाला त्रिपुरा भैरवी रमा बगला चैव मातंगी तथा त्रिपुरसुन्दरी II ५५ कामाक्षी तुलजा देवी जंभिनी मोहिनी तथा তুমব্চালী छिन्नमस्ता 1 Devi Bhagavatam (7.28.54-56) दशसाहस्त्रबाहुका ।। ५६ 1 यहाँ लीला और भी रहस्यमयी हो जाती है। देवी भागवत में RR ரி$ से अनेकों शक्तियाँ प्रकट होती हैं, जिनमें त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) भी हैं। सिद्ध  होता है कि दुर्गा और ललिता परस्पर उत्पन्न करने वाली नहीं इससे हैं, बल्कि वे एक ही सर्वव्यापी चेतना के विभिन्न पहलू हैं। जिस प्रकार ఢగ కైౌ` भी एक ही हैं अग्नि से उष्णता और प्रकाश अलग-अलग दिखाई  उसी प्रकार यह सभी रूप आदिशक्ति के ही स्वरूप हैं। Here the Lila becomes even more mysterious In the Devi Bhagavatam; from the body of Durga emerge numerous Shaktis including Tripurasundari (Lalita) This proves that Durga and Lalita are not sequentially created from one another but are interdependent aspects of the same all- pervadins consciousness. Just as heat and lisht are inseparable from fire so are these forms inseparable from Adishakti. - ShareChat