Ankit Dass
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I'm Disciple of SANT RAMPAL JI MAHARAJ 🙇🙏
#GodMorningSunday #SaintRampalJi #KabirIsGod #सत_भक्ति_संदेश Kindly visit (SANT RAMPAL JI MAHARAJ )Youtube Channel for more information about way of worship. #सुविचार #शिक्षा #भक्ति भावनाएं #ईश्वर आस्था
सुविचार - धनान धाम epfzi आध्यात्म मार्ग में धर्म यज्ञ गुरु के द्वारा ؟٢ की जाती है। वह वास्तव में धर्म यज्ञ होती है। तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज ೌರಾ Dhanana Ashram @DhananaAshram www.SupremeGod.org धनान धाम epfzi आध्यात्म मार्ग में धर्म यज्ञ गुरु के द्वारा ؟٢ की जाती है। वह वास्तव में धर्म यज्ञ होती है। तत्वदर्शी संत रामपालजी महाराज ೌರಾ Dhanana Ashram @DhananaAshram www.SupremeGod.org - ShareChat
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ईश्वर  आस्था - नरक Xrma 7٤9 के भागी ~~ ~ कबीर पापी पूजा बैठिक, भखै माँस मद दोइ। निनकी दीक्षा मृक्ति नह्ि कोटिनरक फल होइ।। जो गुरूजन मौँस भक्षण करते हैंतथा शराब पीते हैं उनसे नाम दीक्षा प्राप्त  करने वालोंकी नहवीं मुक्ति अपिनु  होती मह्ा नरक क भागी होंगे | जिगतगरु तन्वदर्शी संत रामपालजी महाराज [ SPIRIIUAL LEADER SANT RAHPAL JI @SAINTRAMPAL JIN SUPREMEGOD ORG SAINI RAMPAL JI MAHARA] नरक Xrma 7٤9 के भागी ~~ ~ कबीर पापी पूजा बैठिक, भखै माँस मद दोइ। निनकी दीक्षा मृक्ति नह्ि कोटिनरक फल होइ।। जो गुरूजन मौँस भक्षण करते हैंतथा शराब पीते हैं उनसे नाम दीक्षा प्राप्त  करने वालोंकी नहवीं मुक्ति अपिनु  होती मह्ा नरक क भागी होंगे | जिगतगरु तन्वदर्शी संत रामपालजी महाराज [ SPIRIIUAL LEADER SANT RAHPAL JI @SAINTRAMPAL JIN SUPREMEGOD ORG SAINI RAMPAL JI MAHARA] - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान Sant Rampal Ji Maharaj 🎉 गीता अध्याय 18, श्लोक 66 गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर। #सुविचार #शिक्षा #भक्ति भावनाएं #ईश्वर आस्था
सुविचार - गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने शब्द का अर्थ आना किथा है व्रज वन शब्द का अर्थ जाना, जो ೯ 'সস अनुचित चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम्, व्रज, अहम् , त्वा , सर्वपापेभ्यः , मोक्षयिष्यामि , मा, शुचः|l६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको ( माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की (शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पारपोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा ,शुचः ) शोक मत कर। तू (मा, 8 निःशुल्क पायें " पवित्र पुस्तक पूरा पता भेजें  Am, अपना ज्ञान गगा +91 7496801823 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ गीता के रहस्यों का महाखुलासा अन्थ गीता अनुवाद कर्ताओं ने शब्द का अर्थ आना किथा है व्रज वन शब्द का अर्थ जाना, जो ೯ 'সস अनुचित चला जाना आदि होता है। अध्याय १८ का श्लोक ६६ सर्वधर्मान् , परित्यज्य , माम् , एकम् , शरणम्, व्रज, अहम् , त्वा , सर्वपापेभ्यः , मोक्षयिष्यामि , मा, शुचः|l६६११ मेरी ( सर्वधर्मान् ) सम्पूर्ण पूजाओंको ( माम् ) मुझ में (परित्यज्य ) त्यागकर तू केवल ( एकम् ) एक उस अद्वितीय अर्थात् पूर्ण परमात्मा की (शरणम् ) शरणमें (व्रज ) जा। ((अहम् ) मैं (त्वा ) तुझे ( सर्वपापेभ्यः ) सम्पूर्ण पारपोंसे (मोक्षयिष्यामि ) छुड़वा दूँगा ,शुचः ) शोक मत कर। तू (मा, 8 निःशुल्क पायें " पवित्र पुस्तक पूरा पता भेजें  Am, अपना ज्ञान गगा +91 7496801823 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji SUPREMEGODORG @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
#यथार्थ_गीता_ज्ञान Sant Rampal Ji Maharaj #ईश्वर आस्था #भक्ति भावनाएं #शिक्षा #सुविचार 🎉पवित्र गीता जी अध्याय 9 श्लोक 25 में साफ लिखा है कि भूतों को पूजोगे तो भूतों की योनियों में जाओगे और पितर पूजोगे तो पितर योनि में जाओगे। फिर क्यों आप श्राद्ध कर्म, पिंड दान आदि करते हो? ये मोक्ष मार्ग के विपरीत क्रियाएं हैं।
ईश्वर  आस्था - गीता शा२ মালি; বনম্বনা:; বনান; পিনুন; যালি; পিনল্পনা:; गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध যানি  भतानि  यान्ति॰   मद्याजिनः अपि॰ माम।। २५ भूतेज्याः  कारण यह नियम ह॰कि॰ व पिंड आदि कर्मकांड को गलत दवताओंको  प्राप्त होते ह यान्ति टववता: (और ) पूबनेवाले  मार्कण्डेय पुराण में भी कहा है ননাসসাকা नेरा पूजन  दवान मद्याजिनः  प्रमाण है कि वेदों में पितर पूजा भूत प्राप्त हात ह ক্নেনাল ्यान्त पितरांको  5#7 माम पितृवताः  पूजा यानि श्राद्ध कर्म को अविद्या यानि पजनेवाले সণি चितून  पितरोको  प्राप्त होते हॅ। का कार्य बताया है। मूर्खों মালি সাদ চাঁন ৪ ( इसोलिय मेर यान्ति মূনানা  भक्तंका पूजनेवाले पनजन्म भतज्याः ப মূনানা 71 संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये नामदीक्षा व निःशुल्क  Fajci संपर्क सूत्र : Getmo +91 7496801823 पुस्तक प्राप्त करने के लिये  Ploy Google| गीता शा२ মালি; বনম্বনা:; বনান; পিনুন; যালি; পিনল্পনা:; गीता अध्याय 9 श्लोक २५ में श्राद्ध যানি  भतानि  यान्ति॰   मद्याजिनः अपि॰ माम।। २५ भूतेज्याः  कारण यह नियम ह॰कि॰ व पिंड आदि कर्मकांड को गलत दवताओंको  प्राप्त होते ह यान्ति टववता: (और ) पूबनेवाले  मार्कण्डेय पुराण में भी कहा है ননাসসাকা नेरा पूजन  दवान मद्याजिनः  प्रमाण है कि वेदों में पितर पूजा भूत प्राप्त हात ह ক্নেনাল ्यान्त पितरांको  5#7 माम पितृवताः  पूजा यानि श्राद्ध कर्म को अविद्या यानि पजनेवाले সণি चितून  पितरोको  प्राप्त होते हॅ। का कार्य बताया है। मूर्खों মালি সাদ চাঁন ৪ ( इसोलिय मेर यान्ति মূনানা  भक्तंका पूजनेवाले पनजन्म भतज्याः ப মূনানা 71 संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये नामदीक्षा व निःशुल्क  Fajci संपर्क सूत्र : Getmo +91 7496801823 पुस्तक प्राप्त करने के लिये  Ploy Google| - ShareChat
#GodMorningThursday #SaintRampalJi #KabirIsGod #सत_भक्ति_संदेश Kindly visit (SANT RAMPAL JI MAHARAJ )Youtube Channel for more information about way of worship. #सुविचार #शिक्षा #भक्ति भावनाएं #ईश्वर आस्था
सुविचार - ೫ರಕಿ@ ` 29@ स्ामाुतेदु িলম শচ্স  [tan HEI a C1 a यजुवद वेदों र्ें प्रमाणा है कबीर सहेब भगवान हे पवित्र यजुर्वेद अध्याय ४० मं॰ 8 में है कि कविर् मनीषि स्वयम्भूः परिभू ब्यवधाता , भावार्थ हैकि कबीर परमात्मा सर्वज्ञ है (मनीषि का अर्थ सर्वज्ञ होता है) तथा अपने आप प्रकट होता है। वह (परिभू सनातन अर्थात् सर्वप्रथम वाला प्रभु है। वह सर्व ब्रह्मण्डों का (व्यवधाता ) भिन्न भिन्न अर्थात् सर्व लोकों का रचनहार है| Sant Rampal Ji Maharaj संत रामपाल जी महाराज जी से App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क  C1 04 : Play पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 Googlel {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ ೫ರಕಿ@ ` 29@ स्ामाुतेदु িলম শচ্স  [tan HEI a C1 a यजुवद वेदों र्ें प्रमाणा है कबीर सहेब भगवान हे पवित्र यजुर्वेद अध्याय ४० मं॰ 8 में है कि कविर् मनीषि स्वयम्भूः परिभू ब्यवधाता , भावार्थ हैकि कबीर परमात्मा सर्वज्ञ है (मनीषि का अर्थ सर्वज्ञ होता है) तथा अपने आप प्रकट होता है। वह (परिभू सनातन अर्थात् सर्वप्रथम वाला प्रभु है। वह सर्व ब्रह्मण्डों का (व्यवधाता ) भिन्न भिन्न अर्थात् सर्व लोकों का रचनहार है| Sant Rampal Ji Maharaj संत रामपाल जी महाराज जी से App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क  C1 04 : Play पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 Googlel {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
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ईश्वर  आस्था - बलिहारी जाऊं कबीर, बलिहारी गूरू आपने, घडी घड़ी सौनसौ बार। मानुष से देवता किया, करत लागी वार। ] ত Sant Rampal Ji Maharaj Jagat GuruRampalJiorg Coll us 7496801825 बलिहारी जाऊं कबीर, बलिहारी गूरू आपने, घडी घड़ी सौनसौ बार। मानुष से देवता किया, करत लागी वार। ] ত Sant Rampal Ji Maharaj Jagat GuruRampalJiorg Coll us 7496801825 - ShareChat
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सुविचार - यजुर्वेद अध्याय ४० मंत्र १० में लिखा है कि कुठ लोग परमात्मा को निराकार मानते हें, कुठ साकार | यजुर्वेद लेकिन सच्चाई क्या है ? ये केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते हें । तो तत्वदर्शी संत के बारे में जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj যুযুের বলল संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download কাসিয় व निःशुल्क निःशुल्क नामदीक्षा ; 31] 11  पुस्तक प्राप्त करे के लिये संपर्क सूत्र : +917496801823 GoogcPlay {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ यजुर्वेद अध्याय ४० मंत्र १० में लिखा है कि कुठ लोग परमात्मा को निराकार मानते हें, कुठ साकार | यजुर्वेद लेकिन सच्चाई क्या है ? ये केवल तत्वदर्शी संत ही बता सकते हें । तो तत्वदर्शी संत के बारे में जानने के लिए देखिए Sant Rampal Ji Maharaj যুযুের বলল संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download কাসিয় व निःशुल्क निःशुल्क नामदीक्षा ; 31] 11  पुस्तक प्राप्त करे के लिये संपर्क सूत्र : +917496801823 GoogcPlay {5 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
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ईश्वर  आस्था - T UIT गरीब, जाके नाद न बिंद है, घाट मठ नहीं मुकाम। गरीबदास सेवन करे, आदि अनादी राम।। भावार्थः-इस वाणी का अर्थ है कि सच्चा परमेश्वर वह है जिसका शरीर पंचतत्वों से नहीं बना है। केवल वही व्यक्ति उसे प्राप्त कर सकता है जो ম মুক होकर, आत्मज्ञान और सच्चे वचनों के आधार सांसारिक बंधनों पर उसकी भक्ति करता है। SAILOKASHRAMMUNDKA OFFICIAL FOLOW US ON8 SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA T UIT गरीब, जाके नाद न बिंद है, घाट मठ नहीं मुकाम। गरीबदास सेवन करे, आदि अनादी राम।। भावार्थः-इस वाणी का अर्थ है कि सच्चा परमेश्वर वह है जिसका शरीर पंचतत्वों से नहीं बना है। केवल वही व्यक्ति उसे प्राप्त कर सकता है जो ম মুক होकर, आत्मज्ञान और सच्चे वचनों के आधार सांसारिक बंधनों पर उसकी भक्ति करता है। SAILOKASHRAMMUNDKA OFFICIAL FOLOW US ON8 SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat
#GodMorningWednesday #SaintRampalJi #KabirIsGod #सत_भक्ति_संदेश Kindly visit (SANT RAMPAL JI MAHARAJ )Youtube Channel for more information about way of worship. #सुविचार #शिक्षा #भक्ति भावनाएं #ईश्वर आस्था
सुविचार - वेदों में Vanm1z पत्थर की मूर्ति की पूजा का कही उल्लेख नही है। वेदों के विद्वान  कहलाने वाले पत्थर पूजा करते तथा कराते है। वेदों में वर्णित सिरजनहार को भुला दिया है। ೧''೪೫) संत रामपाल जी महाराज AMARBODHBOOK WWW.SUPREMECOD.ORG वेदों में Vanm1z पत्थर की मूर्ति की पूजा का कही उल्लेख नही है। वेदों के विद्वान  कहलाने वाले पत्थर पूजा करते तथा कराते है। वेदों में वर्णित सिरजनहार को भुला दिया है। ೧''೪೫) संत रामपाल जी महाराज AMARBODHBOOK WWW.SUPREMECOD.ORG - ShareChat
#GodMorningWednesday #SaintRampalJi #KabirIsGod #सत_भक्ति_संदेश Kindly visit (SANT RAMPAL JI MAHARAJ )Youtube Channel for more information about way of worship. #ईश्वर आस्था #भक्ति भावनाएं #शिक्षा #सुविचार
ईश्वर  आस्था - এইমাম কী য্পকি पूर्ण संत से लेने के बाद पाप कर्मों का नाश हो जाता है। पाप कर्मों का नाश के बाद दुख नहीं होने रहेंगे क्योंकि दुख का मूल कारण पाप ही होता है। जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज AMARBODHBOOK IIIII.SUPREIIEGOD.ORG এইমাম কী য্পকি पूर्ण संत से लेने के बाद पाप कर्मों का नाश हो जाता है। पाप कर्मों का नाश के बाद दुख नहीं होने रहेंगे क्योंकि दुख का मूल कारण पाप ही होता है। जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज AMARBODHBOOK IIIII.SUPREIIEGOD.ORG - ShareChat