Jay shiree Krishna
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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏
🙏गुरु महिमा😇 - नैतेन किकजतशतेन बहुनैतेन तवाजुन। ঔথতা स्थिर्तो यजग्रतयाीजन है। विष्टभ्याहमिद बहत जाननेसतराक्या अथवा हेअर्जन! इस 434 जगत्को अपनी योगशक्तिकेएक अंश मात्रसे सपूर्ण धारण करके स्थित हँ ||42|| तत्सदिति श्रीमद्र गजुद्नीस्ास्दपनिषृत्तैयोगो : ब्रह्मविद्यायायोगशास्त्र श्रीकृष्णाजु नाम दशमोउध्याय:0 व्यख्याः श्रीकृष्ण अर्जन से कह रहे हैं कि उनके ऐश्वर्य की भगवान सीमाओकाजानना कॅठिनह उन्हन अब तक जभादिव्य गुण देखेहैचे सभीकेवल उनकेएक छोटेसे अंशके प्रभाव हाक्वष्स॰ है। वास्तविकता मे भगवान सम्पूण ब्रह्माड का सभी सृष्टि और सृष्टि के अपने एक अंशसही संभालतेहै  लकिन उनका यह विराट रूप और उनके तत्वोमेव्यप्त ತಇಾೆ प्रदर्शन अर्जूनन अभ तक नहीदेख़ाहै सम्पूर्ण इस श्लोक के माध्यम से भगवान यह भी स्पष्ट कर रहेहैकि रश्वर्यऔर शक्ति असीमित हिै ओर उनकी वास्तविक उनका स्थिति कासम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना मानव क लिए कठिन है। यह श्लोक भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से भगवान की अनत शक्ति और प्रभाव को समझनेकी प्रेरणा देता है! नैतेन किकजतशतेन बहुनैतेन तवाजुन। ঔথতা स्थिर्तो यजग्रतयाीजन है। विष्टभ्याहमिद बहत जाननेसतराक्या अथवा हेअर्जन! इस 434 जगत्को अपनी योगशक्तिकेएक अंश मात्रसे सपूर्ण धारण करके स्थित हँ ||42|| तत्सदिति श्रीमद्र गजुद्नीस्ास्दपनिषृत्तैयोगो : ब्रह्मविद्यायायोगशास्त्र श्रीकृष्णाजु नाम दशमोउध्याय:0 व्यख्याः श्रीकृष्ण अर्जन से कह रहे हैं कि उनके ऐश्वर्य की भगवान सीमाओकाजानना कॅठिनह उन्हन अब तक जभादिव्य गुण देखेहैचे सभीकेवल उनकेएक छोटेसे अंशके प्रभाव हाक्वष्स॰ है। वास्तविकता मे भगवान सम्पूण ब्रह्माड का सभी सृष्टि और सृष्टि के अपने एक अंशसही संभालतेहै  लकिन उनका यह विराट रूप और उनके तत्वोमेव्यप्त ತಇಾೆ प्रदर्शन अर्जूनन अभ तक नहीदेख़ाहै सम्पूर्ण इस श्लोक के माध्यम से भगवान यह भी स्पष्ट कर रहेहैकि रश्वर्यऔर शक्ति असीमित हिै ओर उनकी वास्तविक उनका स्थिति कासम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना मानव क लिए कठिन है। यह श्लोक भक्ति और श्रद्धा के माध्यम से भगवान की अनत शक्ति और प्रभाव को समझनेकी प्रेरणा देता है! - ShareChat
https://www.youtube.com/live/WqFkI-hFn1M?si=daIOdIGocmgbj4cd #🙏शाम की आरती🪔 #काशी विश्वनाथ #श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विश्वनाथ गली, वाराणसी यू० पी० #काशी विश्वनाथ मंदिर घाट वाराणसी #काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी
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https://www.youtube.com/live/8-lR3VWJzCg?si=kU6k5v9_aVmqbD7r #🙏शाम की आरती🪔 #सोमनाथ महादेव मंदिर गुजरात #somnath mahadev #🕉️🙏जय सोमनाथ महादेव 🕉️🙏 #Jay somnath mahadev 📿🙏
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https://youtube.com/live/eKc3whu62Hs?si=UpdlyXNVWO3LY_PE #🙏शाम की आरती🪔 #🙏🙏जय श्री पशुपतिनाथ🙏🙏 #अष्टमुखी श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर मंदसौर मध्यप्रदेश #पशुपतिनाथ जी ##पशुपतिनाथ महादेव🔱🧡
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https://www.youtube.com/live/Q3CGq2NMR6I?si=3oMP-9i5iquPqNgA #🙏शाम की आरती🪔 #mahakal #👉🙏📿JAY MAHAKAL📿🙏👈 #महाकालेश्वर #महाकाल
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https://youtube.com/live/mwbi96qpiwk?si=GblGFf29GdQXyb_4 #🙏शाम की आरती🪔 #🙏 जय मां बगलामुखी #जय मां बगलामुखी🌺🙏 #baglamukhi #baglamukhi Mata ji
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https://www.youtube.com/live/dlnCkXRvLw4?si=tqxzBi4NFbt9EZEn #👉🙏📿JAY MAHAKAL📿🙏👈 #mahakal #महाकालेश्वर #महाकाल #🌹🌹श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन 🌹🌹
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https://youtube.com/live/SSY1kU38MeI?si=aBoFkiEkIexRRz6C #SALASAR #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🚩सालासर बालाजी 🙏 #सालासर बालाजी दर्शन #जय श्री सालासर बालाजी 🙏
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#श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 #भगवद गीता सार #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
श्रीमद भगवद गीता उपदेश 🙏🙏 - यद्यद्विभतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा। तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तिजोडशसम्भवम।। जो-जो भी विभूतियुक्त अर्थत् ऐश्वर्ययुक्त कां्तियुक्त और शक्तियुक्त वस्तुहै उसन्उस को तू मेरे तेज के अंशकीही ঔ্ি্নি জন Il ZQ: इस श्लोक में भगवान श्रीकष्ण ने अपने दिव्य ऐश्वर्य और शक्ति कीपहचान का संकेत र्दिया है। यहाँ भिगवान कह रहेहैं किः यद्द्विभूतिमत्सत्त्वःकिसी भी प्रकार की महानता र्वर्यया विशेषता जो इस संसार मे दिखती है चाहे वह किसी वस्तु मेंहो या किसी व्यक्ति मेंहो श्रीमदूर्जितमेव वाःयाजा विशेषता धन, सौंदर्य  या अन्य प्रकार की प्रसिद्रि का कारण बनती है तत्तदेवावगच्छः उसे पहचाना और समझो किँ वह भी मेरी ही शक्ति का एक अंश है। त्वं मम तेजोडशसम्भवम्ः वह सब कुछ मेरे दिव्य तेज़ या शक्ति सेहीउत्पत्न हआ है] इस प्रकार , भगवान श्रीकृष्ण हमें यह समझाते हैं कि जो कछ भी इस दुनिया में अत्यधिक सुंदर शक्तिशाली या ऐश्वर्यपूर्ण दिखाई देता है चहसब उनके दिव्य तेज़सेउत्पन्न हओहा इसे पहचानकर हमें यह समझना चाहिए कि सभी वस्तूुओं और गुणों का वास्तविक स्रोत भगवान का स्वयं का दिव्य शक्ति हैॉ यद्यद्विभतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा। तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तिजोडशसम्भवम।। जो-जो भी विभूतियुक्त अर्थत् ऐश्वर्ययुक्त कां्तियुक्त और शक्तियुक्त वस्तुहै उसन्उस को तू मेरे तेज के अंशकीही ঔ্ি্নি জন Il ZQ: इस श्लोक में भगवान श्रीकष्ण ने अपने दिव्य ऐश्वर्य और शक्ति कीपहचान का संकेत र्दिया है। यहाँ भिगवान कह रहेहैं किः यद्द्विभूतिमत्सत्त्वःकिसी भी प्रकार की महानता र्वर्यया विशेषता जो इस संसार मे दिखती है चाहे वह किसी वस्तु मेंहो या किसी व्यक्ति मेंहो श्रीमदूर्जितमेव वाःयाजा विशेषता धन, सौंदर्य  या अन्य प्रकार की प्रसिद्रि का कारण बनती है तत्तदेवावगच्छः उसे पहचाना और समझो किँ वह भी मेरी ही शक्ति का एक अंश है। त्वं मम तेजोडशसम्भवम्ः वह सब कुछ मेरे दिव्य तेज़ या शक्ति सेहीउत्पत्न हआ है] इस प्रकार , भगवान श्रीकृष्ण हमें यह समझाते हैं कि जो कछ भी इस दुनिया में अत्यधिक सुंदर शक्तिशाली या ऐश्वर्यपूर्ण दिखाई देता है चहसब उनके दिव्य तेज़सेउत्पन्न हओहा इसे पहचानकर हमें यह समझना चाहिए कि सभी वस्तूुओं और गुणों का वास्तविक स्रोत भगवान का स्वयं का दिव्य शक्ति हैॉ - ShareChat
#shree shivay namastubhyam 🙏🙏 #shree Shivay namastubhyam 🕉️🙏 #shree Shivay namastubhyam 🌿🌿🌼 #shree shivay namastubhym #Shree Shivay Namastubhyam 🙏🙏❤️❤️
shree shivay namastubhyam 🙏🙏 - शिवाय नमस्तूभ्यम् शिवाय नमस्तूभ्यम् शिवाय नमस्तृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम श्री शिवाय नमस्तृभ्यम श्री शिवाय नमस्तभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् शिवाय नमस्तूभ्यम् शिवाय नमस्तूभ्यम् शिवाय नमस्तृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तृभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम श्री शिवाय नमस्तृभ्यम श्री शिवाय नमस्तभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् श्री शिवाय नमस्तुभ्यम् श्री शिवाय नमस्तूभ्यम् - ShareChat