सतीश चंद्र मिश्रा — कानूनी दांव-पेच और बहुजन राजनीति का मेल: वकील से राष्ट्रीय नेता बने सतीश (जन्म 9 नवंबर 1952) ने लंबी राजनैतिक परिक्रमा में न्याय और सामाजिक समावेशन पर जोर दिया; 18 साल तक राज्यसभा में रहने और पार्टी की नीतियों को आकार देने के अनुभव से स्पष्ट होता है कि उनके तर्क-वितर्क का आधार कानूनी पद्धति और सामाजिक-राजनीतिक गणित है — इसलिए उनके कड़े बयान सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि नियम-प्रक्रिया और आंकड़ों पर आधारित प्रतिक्रिया भी माने जाने चाहिए; उदाहरण के तौर पर उन्होंने दलों की नीतियों और समाज में हो रहे भेदभाव पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई, जो दर्शाता है कि उनका राजनीतिक रंग सामाजिक न्याय (social justice) के सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है — सोचिए: जब वकील-नेता कानून की भाषा में समस्या बताता है तो उसका असर न्यायिक व नीतिगत दोनों स्तरों पर पड़ता है। ✨📜🤝 #सतीश_चंद्र_मिश्रा #BSP #क़ानून_और_नीति #सामाजिक_न्याय #RajyaSabha @सतीश चंद्र मिश्रा #सतीश चंद्र मिश्रा #बिहार चुनाव 2020, बीजेपी की रैली, तेजस्वी यादव की रैली, बिहार का मूड #viral #बम - बम भोले #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰

